दर्शन और चेतना

PHILOSOPHY & CONSCIOUSNESS

पुराने सूत्र।
जीवन से नए प्रश्न।

तंत्र, वेदांत, कश्मीर शैव दर्शन और मनोविज्ञान के अध्ययन में मूल संदर्भ और अपने अनुभव, दोनों के लिए स्थान।

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अध्ययन की दिशा

दर्शन और चेतना

01

स्रोत तक लौटना

किसी सूत्र को पढ़ते समय पूछें: यह किस ग्रंथ से आया है, किस संदर्भ में कहा गया है और हम किस अनुवाद या व्याख्या को पढ़ रहे हैं?

02

समानता के साथ भिन्नता

दो परंपराओं में मिलते-जुलते प्रतीक मिलने पर उनके अर्थ अपने-आप एक नहीं हो जाते। तुलना तभी उपयोगी है जब प्रत्येक परंपरा की अपनी भाषा और उद्देश्य को स्थान मिले।

03

पढ़ने से आत्म-अवलोकन तक

एक विचार चुनें और देखें कि वह आपके व्यवहार के बारे में कौन-सा प्रश्न उठाता है। क्या वह प्रतिक्रिया, इच्छा, भय या पहचान को समझने में मदद करता है?

यहाँ अध्ययन का उद्देश्य प्रश्न को जीवित रखना है: मैं जो समझ रहा हूँ, वह मूल स्रोत की बात है, किसी व्याख्याकार का विचार है या मेरी अपनी समझ?

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