एनीग्राम
प्रक्रिया का जीवित नक्शा। वह प्रतीक जिसके बारे में गुरजीफ़ ने बोला था कि इसे पढ़ना आ जाए तो किताबों की ज़रूरत नहीं रहती।
एक वृत्त, उस पर नौ बिंदु, भीतर एक त्रिकोण और छह कोनों वाली एक अजीब आकृति। पहली नज़र में ज्यामिति। पर गुरजीफ़ के लिए यह हर उस प्रक्रिया का चित्र था जो शुरू होती है, बीच में अटकती है, मदद पाती है और पूरी होकर नए चक्र में बदल जाती है।
रसोई में दाल का पकना, बीज का पेड़ बनना, किसी भाषा का सीखना, एक वीडियो का बनना, और इंसान का भीतर से बदलना, सब इसी ढाँचे पर चलते हैं। इस प्रस्तुति में हर नियम के साथ ऐसे ही कई उदाहरण हैं।
नीचे "आगे" दबाएँ, कीबोर्ड के तीर इस्तेमाल करें या स्वाइप करें। चित्र के बिंदुओं को छूकर देखें, ज़्यादातर स्लाइड में वे जवाब देते हैं।
पहले एक उलझन दूर कर लें
आज "एनीग्राम" सुनते ही ज़्यादातर लोग नौ पर्सनैलिटी टाइप के बारे में सोचते हैं: परफ़ेक्शनिस्ट, हेल्पर, अचीवर वगैरह। वह प्रणाली बहुत बाद की है। गुरजीफ़ का एनीग्राम इंसानों को खानों में बाँटने का औज़ार था ही नहीं। उसका विषय प्रक्रिया थी।
गुरजीफ़ का एनीग्राम
1916 के आसपास रूस में शिष्यों को सिखाया। पी. डी. ऊस्पेंस्की ने In Search of the Miraculous में इसे दर्ज किया।
नौ बिंदु एक ही प्रक्रिया के नौ पड़ाव हैं। सवाल यह है: कोई प्रक्रिया कैसे चलती है, कहाँ अटकती है, उसे बाहर से क्या चाहिए।
नींव: Law of Three और Law of Seven।
पर्सनैलिटी एनीग्राम
1960 के दशक में ऑस्कर इचाज़ो (Arica School) और फिर क्लाउडियो नारांजो ने विकसित किया।
नौ बिंदुओं पर नौ स्वभाव या "पैशन" रख दिए गए। हर व्यक्ति का एक टाइप।
उपयोगी मनोवैज्ञानिक भाषा बन सकती है, पर यह गुरजीफ़ की शिक्षा का सीधा हिस्सा नहीं है।
अंतर एक उदाहरण से
पर्सनैलिटी एनीग्राम पूछेगा: "राहुल किस टाइप का है?" गुरजीफ़ का एनीग्राम पूछेगा: "राहुल जो किताब लिख रहा है, वह अभी किस पड़ाव पर है, और वह बिंदु 3 पर क्यों अटकी है?" पहला व्यक्ति का चित्र बनाता है, दूसरा किसी काम या बदलाव की चाल का।
गुरजीफ़ ने दावा किया कि यह प्रतीक एक प्राचीन गुप्त परंपरा से आया है, जिसे अक्सर सूफ़ी स्रोतों से जोड़ा जाता है। उनसे पहले इसका कोई लिखित रूप अब तक प्रमाणित नहीं हुआ। इसलिए इसे "गुरजीफ़ द्वारा प्रस्तुत प्रतीक" मानना सबसे ईमानदार स्थिति है।
एक चित्र, तीन परतें
एनीग्राम तीन चीज़ों को एक के ऊपर एक रखकर बनता है। बटन से हर परत अलग करके देखें।
वृत्त
पूरी प्रक्रिया, जो अपने में बंद है और लौटकर फिर शुरू होती है। बिंदु 9 अंत भी है और अगला आरंभ भी।
त्रिकोण: बिंदु 9, 3, 6
Law of Three। ये वे जगहें हैं जहाँ प्रक्रिया को बाहर से कुछ मिलता है।
भीतरी आकृति: 1, 4, 2, 8, 5, 7
Law of Seven। यह क्रम 1 को 7 से भाग देने पर निकलता है। अगली स्लाइड में यही रहस्य खुलेगा।
1 ÷ 7 = 0.142857…
किसी भी संख्या को 7 से भाग दीजिए, दशमलव के बाद वही छह अंक एक ही घेरे में घूमते रहते हैं। बस शुरुआत का बिंदु बदलता है। कोई भिन्न चुनें और चित्र में देखें उसका चक्र कहाँ से शुरू होता है।
अब 3 से भाग दीजिए
1 ÷ 3 = 0.333…, 2 ÷ 3 = 0.666…, और 3 ÷ 3 = 0.999… यानी 1। तीन से भाग के अंक सिर्फ़ 3, 6, 9 हैं, और सात वाले चक्र में ये तीनों कभी आते ही नहीं।
यही एनीग्राम की बनावट है: सात का आंतरिक प्रवाह अपने घेरे में चलता है और 3, 6, 9 उसे बाहर से छूते हैं। प्रक्रिया की अपनी चाल और उसमें आने वाली बाहरी मदद, दोनों एक ही अंकगणित से अलग होकर एक ही वृत्त पर बैठते हैं।
142857 का गुणा
Law of Three: तीन शक्तियाँ
| शक्ति | भूमिका |
|---|---|
| सक्रिय active | जो शुरू करती है, धक्का देती है |
| निष्क्रिय passive | जो विरोध करती है: जड़ता, प्रतिरोध, सामग्री |
| तटस्थ neutralizing | तीसरी शक्ति, जो दोनों को जोड़कर कुछ नया घटित करवाती है |
दो शक्तियाँ आपस में सिर्फ़ टकराती हैं। घटना तब होती है जब तीसरी आती है। उदाहरण बदलकर देखें:
ऊस्पेंस्की ने इसे "तीसरी शक्ति के प्रति अंधापन" बोला। हम सामान्य रूप से सिर्फ़ इच्छा और विरोध देखते हैं, इसलिए संघर्ष में फँसे रहते हैं। और भूमिकाएँ स्थायी नहीं: दही वाले उदाहरण में दूध निष्क्रिय है, पर दूध निकालते समय वही दूध गाय की ओर से सक्रिय परिणाम है।
Law of Seven: सप्तक और उसके दो अंतराल
संगीत का सप्तक सात सीढ़ियों का है, पर सीढ़ियाँ बराबर नहीं। दो जगह स्वरों के बीच की दूरी आधी रह जाती है: ग और म (Mi और Fa) के बीच, और नि और सां (Si और Do) के बीच। किसी भी स्वर को छूकर सुनें।
प्रक्रिया पर लागू करें
गुरजीफ़ के अनुसार हर प्रक्रिया ऐसे ही चलती है। कुछ समय ऊर्जा ठीक चलती है, फिर अंतराल आता है जहाँ वेग घटता है और दिशा चुपचाप मुड़ जाती है। अंतराल पर सही समय पर बाहर से एक अतिरिक्त धक्का, यानी shock, न मिले तो सप्तक भटक जाता है। उदाहरण चुनकर देखें कि अंतराल ठीक कहाँ आता है:
गुरजीफ़ के लिए यह रूपक नहीं था। वे इसे प्रकृति का वास्तविक नियम मानते थे, जिसे संगीत ने अनजाने में सुरक्षित रखा।
सप्तक को वृत्त पर रखना
अब दोनों नियम मिलते हैं। सा (Do) बिंदु 9 पर, फिर घड़ी की दिशा में रे, ग… और जहाँ अंतराल है वहाँ त्रिकोण का बिंदु बैठता है, यानी झटके की जगह। साथ में एक चलता हुआ उदाहरण भी है।
एक विचित्र बात पकड़िए। पहला झटका बिंदु 3 पर है, ठीक ग और म के बीच। पर दूसरा झटका बिंदु 6 पर है, प और ध के बीच, जबकि संगीत में दूसरा अंतराल नि और सां के बीच आता है। गुरजीफ़ ने बोला था कि यह गलती नहीं, जानबूझकर रखा गया है। इसका अर्थ तब खुलता है जब एक नहीं, तीन सप्तक साथ चलते देखें। अगली स्लाइड वही है।
गुरजीफ़ का अपना उदाहरण: तीन भोजन
गुरजीफ़ इंसान को तीन मंज़िला कारखाना बोलते थे। नीचे की मंज़िल पेट है, जहाँ अन्न आता है। बीच की मंज़िल छाती है, जहाँ साँस से हवा आती है। ऊपर की मंज़िल सिर है, जहाँ इंद्रियों से impressions यानी अनुभूतियाँ आती हैं। तीनों भोजन अपने अपने सप्तक में सूक्ष्म होते जाते हैं। H (Hydrogen) संख्या पदार्थ की सूक्ष्मता का पैमाना है: जितनी छोटी, उतना सूक्ष्म।
अन्न के बिना इंसान हफ़्तों जी लेता है, हवा के बिना मिनटों। गुरजीफ़ के अनुसार अनुभूतियों के बिना एक क्षण भी नहीं। जो भोजन जितना तात्कालिक है, उतना सूक्ष्म और उतना कीमती।
तालिका में एक बात पकड़िए। हवा ठीक उस खाने में प्रवेश करती है जहाँ अन्न 192 पर पहुँचा है। और अनुभूतियाँ ठीक वहाँ आती हैं जहाँ अन्न और हवा दोनों 48 पर हैं। हर नया भोजन उसी सघनता पर आता है जहाँ पिछली प्रक्रिया पहुँच चुकी है, जैसे रेडियो वही आवृत्ति पकड़ता है जिस पर वह ट्यून है। अगली स्लाइड बताती है कि ये संख्याएँ आती कहाँ से हैं।
H768, H192, H48: ये संख्याएँ कहाँ से आती हैं
यहाँ "हाइड्रोजन" रसायन वाला तत्व नहीं है। गुरजीफ़ ने तीन शक्तियों को तीन वाहक नाम दिए: सक्रिय का Carbon (C), निष्क्रिय का Oxygen (O), तटस्थ का Nitrogen (N)। जो पदार्थ तीनों को एक साथ धारण करे और ब्रह्मांड में जिसका निश्चित स्थान हो, वह हाइड्रोजन है। यानी यह पदार्थ की एक अवस्था है, कोई तत्व नहीं।
सृष्टि किरण
बाईं ओर गुरजीफ़ की Ray of Creation है: परम से चंद्रमा तक सृष्टि की सीढ़ी। हर नीचे का लोक ज़्यादा नियमों के अधीन है, इसलिए कम स्वतंत्र और ज़्यादा घना। किसी पायदान को छूकर देखें।
हाइड्रोजन की सीढ़ी
परम के स्तर पर तीनों शक्तियों की सघनता 1, 2 और 3 मानी गई। योग 6, यानी पहला हाइड्रोजन H6। हर पायदान नीचे संख्या दोगुनी होती है। संख्या जितनी बड़ी, पदार्थ उतना घना, कंपन उतने धीमे, और मूल से उतना दूर। किसी हाइड्रोजन को छुएँ:
एक रोचक समानता: इंसान का सामान्य मन H48 पर चलता है, और वह पृथ्वी पर रहता है जो 48 नियमों का लोक है। उच्च भावनात्मक केंद्र H12 पर है, जो सूर्य के स्तर की संख्या है। इस ढाँचे में आत्म-विकास का अर्थ है अपने भीतर वह पदार्थ बनाना जो पृथ्वी के नहीं, सूर्य के नियमों पर चलता है।
तीन भोजन को रोज़ के जीवन में कैसे बरतें
पहले दो भोजन शरीर अपने आप पचा लेता है। तीसरा सिर्फ़ इंसान खुद पचा सकता है। इसलिए गुरजीफ़ के लिए ध्यान देना कोई नैतिक सलाह नहीं थी, यह भोजन का प्रश्न था: बिना जागे जिया गया दिन, भूखा बीता दिन है।
अन्न, H768
खाते समय पहले दो कौर पूरे ध्यान से: स्वाद, बनावट, गरमाहट। ऐसा करते ही भोजन इंप्रेशन भी बन जाता है और एक ही थाली दो मंज़िलों को खिलाती है।
हवा, H192
दिन में कई बार कुछ क्षण रुककर साँस को जानिए, बदलिए मत। घबराहट में साँस उथली होती है और उसी क्षण सोच भी संकरी हो जाती है। बीच की मंज़िल भावना से जुड़ी है।
इंप्रेशन, H48
पूछिए कि दिन भर आप क्या "खा" रहे हैं। तीन घंटे की बेमतलब स्क्रॉलिंग इस स्तर पर तीन घंटे जंक फ़ूड जैसी है। और ऊँची किताब भी बिना जागे पढ़ी जाए तो बस गुज़र जाती है।
भावना, दूसरा झटका
हफ़्ते में एक नकारात्मक भावना चुनिए, जैसे झुँझलाहट। तय कीजिए कि उसे व्यक्त नहीं करेंगे, सिर्फ़ देखेंगे। दबाना नहीं, देखना। इस फ़र्क को समझ लेना आधा काम है।
आज का छोटा प्रयोग
इन्हें आज आज़माकर देखें। शाम को लौटकर गिनिए कि कौन सा क्षण याद में टिका।
परख का सबसे आसान तरीका: पिछले मंगलवार को क्या देखा, किससे मिले, रास्ते में क्या था? ज़्यादातर कुछ याद नहीं। वह दिन इंप्रेशन के स्तर पर बिना पचे गुज़र गया। जो क्षण बरसों बाद भी ताज़ा है, उसमें आप मौजूद थे।
दो तरह के झटके: जो मिलता है, और जो कमाना पड़ता है
बिंदु 3 और 6 की पूरी शिक्षा इस एक अंतर में है। कुछ झटके प्रकृति या हालात अपने आप दे देते हैं। कुछ सिर्फ़ इंसान की जागरूकता से आते हैं।
यांत्रिक झटका (बिंदु 3)
mechanical shock: बाहर से, बिना प्रयास के।
साँस के साथ हवा। परीक्षा की तारीख जो पढ़ाई को तेज़ कर दे। किसी दोस्त का "तुम्हारा वीडियो कब आएगा?" पूछ लेना। बारिश का सही समय पर आ जाना।
सचेत झटका (बिंदु 6)
conscious shock: भीतर से, सिर्फ़ जागकर।
गुस्से के क्षण में खुद को याद कर लेना। अपनी बनाई चीज़ को पराई नज़र से देख पाना। तारीफ़ सुनकर फूलने के बजाय देखना कि भीतर क्या हुआ।
रोज़ के जीवन से जोड़ियाँ
| प्रक्रिया | बिंदु 3 पर बाहरी मदद | बिंदु 6 पर भीतरी जागना |
|---|---|---|
| वज़न घटाना | डॉक्टर की रिपोर्ट, कोई साथी | भूख और आदतन खाने में फ़र्क देख पाना |
| किताब लिखना | संपादक, प्रकाशक की समय सीमा | अपने प्रिय पर बेकार अध्याय को काट पाना |
| रिश्ता निभाना | परिवार का साथ, कोई साझा ज़िम्मेदारी | अपनी अपेक्षा को सामने वाले पर थोपते हुए पकड़ लेना |
| बच्चे की परवरिश | स्कूल, दादा दादी, अनुभवी सलाह | अपने अधूरे सपने बच्चे पर लादते हुए खुद को देख लेना |
| यूट्यूब चैनल | कोलैब, एल्गोरिद्म का एक वीडियो उठा देना | व्यूज़ के पीछे भागते हुए अपना मूल विषय याद रखना |
गौर कीजिए: दूसरे कॉलम की चीज़ें कोई दूसरा आपको दे सकता है। तीसरे कॉलम की कोई नहीं दे सकता। गुरजीफ़ के अनुसार ज़्यादातर प्रक्रियाएँ इसी वजह से बिंदु 6 पर यांत्रिक हो जाती हैं या उलटी दिशा में मुड़ जाती हैं।
भीतरी रेखाएँ: प्रक्रिया अपने भविष्य को जानती है
वृत्त पर चलना समय की चाल है: 1 के बाद 2, फिर 3। पर भीतर की रेखाएँ 1 से 4, 4 से 2, 2 से 8, 8 से 5, 5 से 7 और 7 से वापस 1 को जोड़ती हैं। हर पड़ाव अपने पड़ोसी से ही नहीं, आगे और पीछे के दूर के पड़ावों से भी जुड़ा है। कोई बिंदु छूकर देखें।
चित्र में किसी बिंदु को छुएँ।
एक घरेलू उदाहरण
शादी की तैयारी सोचिए। मेहमानों की सूची (बिंदु 2) का सीधा रिश्ता विदाई और भोजन परोसने (बिंदु 8) से है: जितने लोग सूची में, उतनी थालियाँ अंत में। हलवाई तय करते (बिंदु 4) समय पहली बजट बैठक (बिंदु 1) याद रखनी पड़ती है। अच्छा आयोजक समय की सीधी रेखा में नहीं, इन भीतरी रेखाओं में सोचता है।
गुरजीफ़ ज़ोर देते थे कि एनीग्राम को गति में समझना चाहिए। उनके पवित्र नृत्यों (Movements) में शिष्य फ़र्श पर बने एनीग्राम की रेखाओं पर चलते थे, हर व्यक्ति एक अंक बनकर। चित्र में चलते बिंदु उसी का संकेत हैं।
उदाहरणों की कार्यशाला
ये गुरजीफ़ के अपने उदाहरण नहीं, उनके ढाँचे के व्याख्यात्मक प्रयोग हैं, ताकि नक्शा रोज़ के काम में दिखे।
एक प्रक्रिया चुनें, फिर चित्र के बिंदु छूकर हर पड़ाव और उसकी भीतरी कड़ियाँ देखें। या "पूरा चलाएँ" दबाएँ।
अब सोचिए, आपके कितने काम बिंदु 3 पर रुके, क्योंकि बाहर से कोई नया इनपुट नहीं आया। और कितने बिंदु 6 पर बिगड़े, जहाँ काम तो हुआ पर किसी ने पूरे को जागी हुई नज़र से नहीं देखा।
अभ्यास: अपनी प्रक्रिया मैप करें
अपनी कोई चल रही प्रक्रिया चुनें: कोई सीख, रिश्ता, आदत या प्रोजेक्ट। हर पड़ाव में दो तीन शब्द लिखें, चित्र अपने आप भरता जाएगा। पहले समझना हो तो कोई नमूना भरकर देखें।
तीन सवाल जो असली काम हैं
बिंदु 3 पर आपको बाहर से क्या चाहिए जो आप अभी माँग नहीं रहे? बिंदु 6 पर किस क्षण आपको खुद को याद रखना होगा, यानी self-remembering, ताकि प्रक्रिया यांत्रिक न हो जाए? और आपका बिंदु 9 अगले सप्तक का कौन सा सा (Do) बनेगा?
भारतीय दृष्टि से संवाद
तुलना समझ को गहरा करती है, बशर्ते दो प्रणालियों को एक न मान लिया जाए।
सप्तक और स्वर
सा रे ग म प ध नि सां। शुद्ध स्वरों (बिलावल थाट) में ग से म और नि से सां की दूरी आधी है, बिल्कुल Mi से Fa और Si से Do की तरह। भारतीय संगीत ने यह असमानता सदियों से सुनी और साधी है। गुरजीफ़ का दावा बस यह है कि यह असमानता संगीत तक सीमित नहीं, हर प्रक्रिया का गुण है।
तीन शक्तियाँ और त्रिगुण
कई लोग रजस को सक्रिय, तमस को निष्क्रिय और सत्त्व को तटस्थ शक्ति से जोड़ते हैं। यह तुलना उपयोगी है पर पूरी नहीं: त्रिगुण प्रकृति के स्थायी स्वभाव हैं, जबकि गुरजीफ़ की तीन शक्तियाँ किसी एक घटना में निभाई गई भूमिकाएँ हैं जो बदल सकती हैं।
इच्छा, ज्ञान, क्रिया
कश्मीर शैव दर्शन में चैतन्य की तीन शक्तियाँ। Law of Three की नज़र से पढ़ें तो प्रश्न उठता है: किसी संकल्प में इच्छा सक्रिय है, पर वह घटना कब बनती है? जब ज्ञान इच्छा और क्रिया के बीच तीसरी शक्ति बनकर आता है।
तीन भोजन और कोश
तैत्तिरीय उपनिषद के कोश बहुत पास आते हैं: अन्नमय कोश अन्न से, प्राणमय कोश वायु से, मनोमय कोश अनुभूति और विचार से पलता है। स्थूल से सूक्ष्म की वही सीढ़ी। अंतर दृष्टि में है: उपनिषद कोशों को आत्मा के आवरण मानते हैं जिनसे पार जाना है, गुरजीफ़ इन्हें कारखाने का कच्चा माल मानते हैं जिससे आत्मा बनानी है।
आत्म-स्मरण और साक्षी
बिंदु 6 का सचेत झटका, यानी आत्म-स्मरण, वेदांत और शैव परंपरा के साक्षी भाव से मिलता है। अंतर तरीके में है: गुरजीफ़ इसे आसन पर नहीं, काम करते, बोलते, चलते हुए साधने पर ज़ोर देते हैं।
शब्दावली
आगे कहाँ पढ़ें
पी. डी. ऊस्पेंस्की, In Search of the Miraculous, विशेष रूप से अध्याय 9 (भोजन और हाइड्रोजन) और अध्याय 14 (एनीग्राम)। जे. जी. बेनेट, Enneagram Studies। गुरजीफ़ की Beelzebub's Tales to His Grandson, जिसमें ये नियम मिथक की भाषा में छिपे हैं।
रेत पर बना चित्र
ऊस्पेंस्की के वर्णन में गुरजीफ़ ने लगभग यह बोला था: रेगिस्तान में अकेला कोई व्यक्ति रेत पर एनीग्राम खींचे, तो उसमें ब्रह्मांड के शाश्वत नियम पढ़ सकता है।
इसका मतलब यह नहीं कि चित्र में जादू है। जो इंसान अपनी किसी एक प्रक्रिया को पूरे ध्यान से देख ले, कहाँ वह शुरू हुई, कहाँ अटकी, कहाँ बाहर से मदद आई और कहाँ भीतर से जागना पड़ा, वह हर प्रक्रिया को समझने लगता है। दाल का पकना और आत्मा का पकना, दोनों एक ही नक्शे पर चलते हैं।
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